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Debt distress and inflation in India

  Debt Distress in India: India's debt distress refers to the situation where the government or individuals face challenges in managing their debt obligations. High levels of debt, particularly when combined with other factors like low economic growth or fiscal mismanagement, can lead to debt distress. However, it's important to note that India's debt distress situation can vary depending on whether we consider government debt, corporate debt, or individual debt. Government Debt: India's government debt-to-GDP ratio has been a concern in recent years. As of September 2021, India's government debt-to-GDP ratio stood at around 90%, which is relatively high compared to some other emerging economies. However, it's worth mentioning that India's debt distress situation is influenced by various factors, including fiscal policies, economic growth, and the ability to service debt. Corporate Debt: The corporate sector in India has also faced challenges related to debt

2023 में हाइब्रिड नौकरियां अपना रहीं कंपनियां

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पेशेवर सेवा नेटवर्क लिंक्डइन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि नियुक्तियां भले ही वैश्विक महामारी पूर्व स्तर पर आ गई हैं मगर इस साल की नियुक्तियों के दौरान कामकाज के तरीकों के संबंध में भारतीय कंपनियों का रुख सबसे अधिक लचीला दिख रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल सिर्फ दफ्तर आकर काम करने वाली नौकरियां 10 फीसदी तक कम हो गई हैं, शुरुआती स्तर पर हाइब्रिड नौकरियां 60 फीसदी बढ़ी हैं। यह अध्ययन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में जनवरी-फरवरी 2023 के दौरान लिंक्डइन पर डाली गईं सभी नौकरियों के प्रतिशत पर आधारित हैं। ये नौकरियां रिमोट, हाइब्रिड और दफ्तर आकर काम करने के लिए डाली गई थीं। इस बदलाव से नए स्नातकों के पास नौकरी चुनने की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती नौकरियों के लिए डिजाइन, एनालिटिक्स और जावा स्क्रिप्ट शीर्ष कौशल में शामिल थे। स्नातक की डिग्री रखने वालों के लिए जोखिम सलाहकार, निवेश प्रबंधक और वित्त प्रशासक जैसी भूमिकाओं की नौकरी में सर्वाधिक तेजी देखी गई। नियोक्ताओं ने भी टेक्नोलॉजी एसोसिएट, कैटलॉग स्पेशलिस्ट और बिजनेस इंटीग्रेशन एनालिस्

सेंसेक्स पहुँचा 65,000 की चोटी, रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा निफ्टी

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विदेशी निवेशकों की रकम लगातार आने से शेयर बाजार चढ़ता ही जा रहा है। इसीलिए बेंचमार्क सूचकांक आज एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। सेंसेक्स पहली बार 65,000 अंक के पार चला गया और लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी के बीच निफ्टी 134 अंक चढ़कर 19,323 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 487 अंक बढ़कर 65,205 पर बंद हुआ। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 1,996 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। जून में विदेशी निवेशकों ने कुल 52,366 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे ज्यादा निवेश है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (एमकैप) इस तेजी के बीच 298.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह भी नया रिकॉर्ड है और 300 लाख करोड़ रुपये का पूंजीकरण करीब ही है। विशेषज्ञों ने कहा कि वृद्धि के आसार बेहतर होने और भारत में कंपनियों की आय स्थिर रहने के कारण बाजार में तेजी बनी हुई है। मिरे असेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Mirae Asset Investment Managers) के मुख्य निवेश अ​धिकारी (CIO) नीलेश सुराणा ने कहा, ‘वैश्विक अनिश्चितता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्

Japan, Australia and US vow to work together against China

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The United States is pressing a diplomatic offensive to counter Chinese influence in the region. The defense ministers of the United States, Australia and Japan agreed Saturday to boost military cooperation in the face of China's growing ambitions. "We are deeply concerned by China's increasingly aggressive and bullying behavior in the Taiwan Strait, and elsewhere in the region," US Defense Secretary Lloyd Austin said as he welcomed his counterparts from Australia and Japan to the US military headquarters for the Pacific region. "Our interest lies in the upholding of the global rules-based order. But we see that order under pressure in the Indo-Pacific as well, as China is seeking to shape the world around it in a way that we've not seen before," said the Australian minister, Richard Marles. The United States is pressing a diplomatic offensive to counter Chinese influence in the region. On Thursday Washington announced an $810 million aid pac

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के दोष/हानियाँ/अवगुण । Disadvantages of International Trade

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यद्यपि अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से अनेक आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक लाभ प्राप्त होते हैं पर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से होने वाली हानियाँ इतनी भयंकर हैं कि उसके नियंत्रण की प्रवृत्ति को बल मिलता है । मुख्य हानियाँ इस प्रकारहैं:- { 1 } विदेशी प्रतियोगिता के कारण उद्योगों का पतन :- प्रतिस्पर्द्धा तब तक अच्छी तरह लाभप्रद मानी जाती है जब तक प्रतियोगिता करने वाले राष्ट्रों का आर्थिक विकास समान स्तर पर हो । वास्तव में विश्व में ऐसे राष्ट्र अधिक है जो पिछड़े हैं और कुछ ही विकसित राष्ट्रों को विदेशी बाजार में अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होते हैं । अविकसित पिछड़े राष्ट्रों के घरेलू उद्योग विकसित राष्ट्रों के आधुनिक उद्योगों को प्रतिस्पर्द्धा में टिक नहीं पाते । उनका पतन प्रारम्भ हो जाता है । ब्रिटिश शासनकाल में भारत में इंग्लैंड से निर्मित माल का अत्यधिक मात्रा में आयात किये जाने से ही भारत के घरेलू उद्योगों का पतन हुआ । { 2 } प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग :- किसी भी देश में प्राकृतिक साधनों की एक सीमा होती हैं । अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण पिछड़े राष्ट्रों के प्राकृतिक साधनों का उपयोग विकसित राष्ट्

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का उपयोग, लाभ एवं महत्त्व / Uses, Advantages & Importance of International Trade

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सभी राष्ट्रों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का सामान महत्त्व नहीं है, फिर भी उन राष्ट्रों के लिए जिनकी अर्थव्यवस्था विदेशी व्यापार प्रधान है या जो अपनी उत्पत्ति का एक चौथाई से अधिक भाग निर्यात करते हैं, औद्योगिक निर्मित माल निर्यात कर कच्चे माल का आयात करते हैं । अपने देश में श्रम-विभाजन का लाभ उठाने के लिए विशिष्टीकरण अपनाते हैं । अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सभी राष्ट्रों को लाभ मिलता है । केवल मात्रा में अन्तर हो सकता है । सामान्यतः निम्न लाभ मिलते हैं :- { 1 } प्राकृतिक साधनों का पूर्ण उपयोग :- अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार द्वारा ही सब राष्ट्र अपने प्राकृतिक साधनों का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं, तुलनात्मक लाभ का स्वरूप बहुत-कुछ प्राकृतिक साधनों की उपलब्धि पर निर्भर है, जैसे - भारत में अभ्रक का पूरा उपयोग न होने पर भी विदेशों में निर्यात कर उसका लाभ लेने की चेष्टा की जा रही है । प्रत्येक देश प्रायः उन उद्योगों में ही विशिष्टीकरण अपनाता है, जिसके प्राकृतिक साधन देश में उपलब्ध हैं और कम लागत पर वस्तुओं का उत्पादन करते हैं । इससे साधनों का पूरा-पूरा उपयोग होता है । { 2 } श्रम-विभाजन एवं विशिष

Method of International Payments | अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों के तरीके

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अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों की आधुनिक लोकप्रिय व्यवस्था बैंकों के माध्यम से साख-पत्रों द्वारा की जाती है, किन्तु अन्य तरीके भी अपनाये जाते हैं जैसा कि अग्र तालिका से स्पष्ट है :- { 1 } आयतों का निर्यातों द्वारा भुगतान ( Exports Pay for Imports ) :- यह अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान की पुरानी पद्धति है, जिसके अंतर्गत एक देश अपने द्वारा आयातित माल एवं सेवाओं का भुगतान उतने ही मूल्य के निर्यातों के द्वारा कर देता है । दो पक्षों में बराबर मूल्य के आयात-निर्यात से लेन-देन का निपटारा हो जाता है, जैसे भारत के A ने इंग्लैंड के B से 1 हजार पौण्ड की मशीन मँगाई और बदले में A ने B को उतने ही मूल्य के कल-पुर्जे निर्यात कर दिये । यह भुगतान दो से अधिक पक्षों में भी आयात-निर्यात द्वारा पूरा कर लिया जाता है । { 2 } धातुओं के हस्तांतरण द्वारा भुगतान ( Payments Through Transfer of Bullion ) : - जब विभिन्न देशों में धात्विक मुद्रामान (स्वर्णमान, रजतमान अथवा द्विधातुमान) प्रचलित था, उस समय अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान सोने-चाँदी के सिक्कों, टुकड़ो अथवा बहुमूल्य धातुओं के हस्तांतरण द्वारा किया जाता था पर भेजने और मँ

Causes or Need of International Payments | अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों की आवश्यकता क्यों और कारण

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अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों की आवश्यकता वस्तुओं व सेवाओं के आयात-निर्यात का मूल्य चुकाने, पूँजी के अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन हस्तांतरण, आर्थिक सहायता एवं अनुदान एवं आय के हस्तांतरण के कारण होती है । एक देश के क्रेता (आयतकर्ता) विदेशी विक्रेता (निर्यातकों) को भुगतान करते हैं । इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं अन्य लेन-देनों के कारण ही अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों की आवश्यकता होती है, जिसका संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित शीर्षकों के अन्तगर्त किया जा सकता है :- { 1 } दृश्य व्यापार अथवा वस्तुओं का क्रय-विक्रय ( Merchandise Transaction ) :- अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के बीच बड़े पैमाने पर वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है । ये वस्तुएँ उपभोग, उत्पादन व पूँजीगत हो सकती है । आयातक क्रेता के रूप में भुगतान देते हैं तथा निर्यातक विक्रेता के रूप में क्रेता देशों से भुगतान लेते हैं । इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों का प्रमुख कारण विभिन्न देशों में व्यापार अथवा वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है । { 2 } अदृश्य व्यापार अथवा सेवाओं का क्रय-विक्रय ( Service Transaction ) :- आजकल विभिन्न देशों के

Meaning of International Payments | अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान का अर्थ

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अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की एक महत्त्वपूर्ण समस्या विदेशी भुगतानों की है । आन्तरिक व्यापार में तो क्रेता एवं विक्रेता एक ही देश के निवासी एवं एक ही राजनैतिक प्रभुसत्ता में होने के कारण व्यापारिक सौदों व अन्य आर्थिक दायित्वों का निपटारा स्वदेशी प्रचलित मुद्रा के प्रत्यक्ष लेन-देन के द्वारा आसानी से कर लेते हैं पर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में क्रेता और विक्रेता दोनों अलग-अलग देशों के होते हैं । प्रत्येक देश की अपनी अलग-अलग विधिग्राह्य मुद्राएँ होती हैं । एक ही मुद्रा दूसरे देश में विधिग्राह्य व प्रचलित न होने के कारण भुगतान लेने वाला अपने देश की ही प्रचलित मुद्रा में भुगतान लेना चाहता है । यही नहीं, सरकार द्वारा विनिमय नियन्त्रण करने तथा विदेशी विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों में जटिलता बढ़ती है । इसके अतिरिक्त विदेशी भुगतान प्रत्यक्ष न होकर बैंकों, स्वीकृति गृहों, बिल-ब्रोकरों आदि के माध्यम से होते हैं । उसकी प्रक्रिया भी कई औपचारिकताओं से पूर्ण होती है । अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों का अर्थ ( Meaning of International Payments ) :- अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थि